सदस्य विधान परिषद् लखनऊ खण्ड-स्नातक, उत्त्तर प्रदेश

शिक्षक सम्मान समारोह एवं शैक्षिक संगोष्ठी कार्यक्रम।

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शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नही होते हैं, सेवाकाल में रहते हुए वह मासूमों को शिक्षा और संस्कार देते हैं तो अवकाश ग्रहण के पश्चात अपने अनुभवों के आधार पर समाज का मार्गदर्शन करते हैं, वह राष्ट्र निर्माता हैं, इसीलिए गुरू की उपाधि माता-पिता से भी बढ़कर बताई गई है।