आज विधान परिषद में नारी शक्ति अधिनियम के समर्थन में मजबूती से अपनी आवाज उठाई।
यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकार, सम्मान और आत्मसम्मान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस और सपा, इस मुद्दे पर सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय विरोध का रास्ता चुन रहे हैं।
देश की आधी आबादी इससे बेहतर की अपेक्षा रखती है।
विरोध के बावजूद, हम नारी सशक्तिकरण और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
नारी शक्ति का सम्मान ही राष्ट्र की प्रगति का आधार है।


