इंजी० अवनीश कुमार सिंह

मनुष्य का परम कर्तव्य है अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर तथा फल की चिन्ता किये बिना लक्ष्य प्राप्ति हेतु पूर्ण मनोयोग से कर्म करें।

प्रत्येक मनुष्य का परम कर्तव्य है कि वह अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर तथा फल की चिन्ता किये बिना लक्ष्य प्राप्ति हेतु पूर्ण मनोयोग से कर्म करें। फल की चिन्ता इस लिए नहीं करना चाहिए क्योंकि परिणाम के विषय में अधिक सोच-विचार करने से कभी – कभी हमारे मन में नकारात्मक भावों की प्रबलता हो जाती है जिससे हमारे कदम कर्म मार्ग में विचलित होने लगते है। इस प्रकार किया गया कर्म निश्चित ही हमें हमारे लक्ष्य को प्राप्त करने प्रभावी कारक बनता है किन्तु कभी कदाचित परिणाम अनुकूल नहीं भी आता है।

इसका अर्थ है कि हमारे प्रयास में कहीं कोई कमी अवश्य रह गयी। तब हमारे लिए आवश्यक है कि हम निराशा को स्वंय पर हावी न होने दें, हीन भावना से ग्रसित न होते हुए उस कमी को दूर कर अधिक ऊर्जा के साथ लगें तो अवश्य ही हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगें।अभी हाल ही में बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित हुए है, सफलता प्राप्त करने वाले समस्त मेधावी छात्र/छात्राओं के गुरूजन तथा आपके माता-पिता सहित समस्त परिवारजन को हार्दिक बधाई तथा आपके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं। प्यारे बच्चों ! आपकी सफलता से आपके गुरूजन तथा विद्यालय का मान बढता है, और शैक्षिक उत्कृष्टता बनाये रखने की प्ररेणा भी मिलती है। साथ-ही आपके अभिभावकों की उन अपेक्षाओं, महत्वाकांक्षाओं को भी गाति मिलती है जिन्हे साकार करने का स्वप्न वे दिन-रात देखते रहते है, किसी कारणवश जो छात्र असफल हुए है उन्हें भी निराश होने की आश्यकता नहीं है। इस असफलता को कमजोरी न बनाकर, प्ररेणा ग्रहण करते हुए सफलता की सीढी बना लें जिससे परिणाम निश्चित रूप से आपके अनुकूल होगा।हमारा जीवन अनेक परीक्षाओं में उत्तीर्ण होकर ही समाज व देश के लिए प्ररेणादायी बना है। अनेक प्रश्न ऐसे होते है जिनका उत्तर हमें स्वंय या कभी-कभी किसी उचित मार्ग दर्शन से ढूॅढना होता है। ऐसा ही एक प्रश्न सफलता प्राप्त कर चुके छात्रों के सामने भी बडा है कि भविष्य में हम क्या करेगें ? क्या बनेंगे ? जीव- मापन हेतु हमें किस रास्ते पर चलना होगा ? आदि । इसी के साथ माता-पिता के द्वारा देखे गये सपने को पूरा करने के लिए छोटी सी उम्र में अत्यधिक दबाव का अुभव कर रहे होंगे किन्तु इस दबाव को कम करने का एक मात्र उपाय यह है कि आदरणीय अभिभावक जन कृपया अपनी अति महत्वकांक्षी को बच्चों पर बोझ न बनने दें।

उनकी क्षमता स्वंय पहचाने तथा उन्हें भी अपनी क्षमता और पर्याप्त अवसरों के मध्य सामंजस्य स्थापित करने में सहायता करे। उन्हें न केवल स्वंय अपना पेट पालने, अपने परिवार का पोषण करने की सीख दी जाय बल्कि उनें संसार के समक्ष एक प्ररेणा बनने तथा समाज और राष्ट्र-कल्याण की भावना उत्पन्न की जाय। हम सभी जानते है कि सृष्टि के समस्त चराचर प्राणियों में मनुष्य का स्थान सर्वोपरि है। कहा भी गया है “बडे भाग मानुस तन पावा सुर दुर्लभ सद्ग्रन्थ नि गावा’’ हम सभी के आस-पास ऐसे अनेक उदाहरण है मौजूद है जिन्होने न केवल अपने लिए बल्कि समाज और देश के लिए बहुत कुछ किया है। मार्ग दुर्गम अवश्य है किन्तु बाधाओं को पार लेने पर मंजिल अवश्य मिलती है। इस कठिनाई से हमें पीछे नहीं मुड़ना है। भारतीय इतिहास में सरदार बल्लभ भाई पटेल, पूर्व राष्ट्रपति और भारत के मिसाइल मैन डा0 ए.पी.जे.अब्दुल कलाम, वर्तमान प्रधामंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी आदि का जीवन फूलों का सेज नहीं रहा है किन्तु इन्होने न केवल स्वप्न देखा बल्कि उसे साकार करने के लिए दृढ संकल्पित भी रहे। इस अतिरिक्त अनेक ऐसे भूत और वर्तमान व्यक्तित्व हमारे मध्य है जो सम्पूर्ण विश्व का मार्गदर्शन करने वाले है इनमें धीरू भाई अम्बानी, सुन्दर पिचाई, बिलगेट्स, सत्यनाडेला आदि के नाम उल्लेखनीय है। से सभी अपने कार्य क्षेत्र में उत्कृष्टतम शिखर पर स्थापित व्यक्तित्व है। इनसे प्ररेणा ग्रहण करने की आवश्यकता है। हमारे आदर्श ऐसे व्यक्ति होने चाहिए।


यह सत्य है कि जब व्यक्ति स्ंवय का आकलन स्वंय से करके अन्तर्मन की आवाज सुनकर लक्ष्य का निर्धारण करता है तो कार्य की सिद्वि निश्चित रूप से होती है और परिणाम भी व्यक्ति के कदम चुमती है जिसका प्रयास अपेक्षित दिश में मन-वाणाी और कर्म की एकनिष्ठता के आधार पर होता है। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास भी है कि आप सब भी अवश्य अपने उद्द्वेश्य में सफल होकर परिवार, समाज तथा देश को गौरवान्वित करेंगें। जीवन संघर्ष में सुखद और प्रभावी सफलता हेतु आप सभी को अनन्त शुभकामनाए तथा उज्ज्वल भविष्य-हेतु ईश्वर से प्रार्थना ।